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दिल्ली में इलेक्ट्रिक कारों से घूमेंगे सरकारी कर्मचारी

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mahindra e verito
 देश की राजधानी दिल्ली में जैसे-जैसे लोगों की संख्या बढ़ रही है, वैसे ही वाहनों की संख्या भी बढ़ रही है। ज्यादा गाड़ियां चलने की वजह से यहां प्रदुषण भी काफी बढ़ गया है। इस समस्या से थोड़ी निजात पाने के लिए सरकार ने एक अहम फैसला लिया है, इस फैसले के अनुसार अब दिल्ली के सरकारों दफ्तरों में पेट्रोल और डीज़ल गाड़ियों के बजाय इलेक्ट्रिक कारों का इस्तेमाल का जाएगा। इसके लिए सरकार के स्वामित्व वाली एनर्जी इफिसिएंसी सर्विस लि. (ईईएसएल) ने 10,000 इलेक्ट्रिक सेडान खरीदने के लिए एक टेंडर निकाला है।

ईईएसएल की ओर से निकाले गए टेंडर के अनुसार सभी इलेक्ट्रिक सेडान चार मीटर से लंबी और इनका व्हीलबेस 2500 एमएम से बड़ा हो सकता है। इन सेडान में 30 हजार वॉट या इससे अधिक क्षमता वाली इलेक्ट्रिक मोटर लगी होनी है, जो एक फुल चार्ज में कम से कम 130 किमोमीटर (बिना एसी) चले और इसकी टॉप स्पीड 80 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा होनी चाहिए। नॉर्मल चार्जिंग से छह घंटे चार्ज करने और फास्ट चार्जिंग से 90 मिनट चार्ज करने के बाद यह 100 किलोमीटर तक चलनी चाहिए।

ईईएसएल ने टेंडर में यह भी कहा है कि इस इलेक्ट्रिक सेडान में एक टेलिमेटिक्स डिवाइस भी लगी होनी चाहिए, जिस से कार की परफॉमेंस, रोजाना तय की गई दूरी, रूट, चार्जिंग इंर्फोमेशन, एनर्जी खपत और ऑपरेटर आईडी समेत कई जानकारी मिल सके।

इन गाड़ियों को चार्ज करने के लिए ईएसएसएल जल्द ही दिल्ली एनसीआर में करीब 3,000 एसी और 1,000 डीसी चार्जिंग पॉइंट लगाएगी। यहां गाड़ी को चार्ज करने के बाद मोबाइल से भुगतान किया जा सकेगा। भारत में अभी केवल महिन्द्रा ही इलेक्ट्रिक कारें बनाती है, लेकिन इसकी एक भी कार ईईएसएल के मानकों पर खरी नहीं उतरती है। महिन्द्रा की ईवेरिटो की रेंज जरूर 110 किलोमीटर है, लेकिन इसे चार्ज होने में काफी समय लगता है। अब देखने वाली बात ये है कि महिन्द्रा अपनी इलेक्ट्रिक रेंज में कुछ सुधार कर यह टेंडर लेती है या फिर दूसरी ही कंपनी यहां मौका मारती है।